गुरुवार,
16 अप्रैल 2026
आज का वचन

यशायाह 40:28-31

“सचमुच तूने सुना है और जानता है कि यहोवा परमेश्वर बुद्धिमान है। जो कुछ वह जानता है उन सभी बातों को मनुष्य नहीं सीख सकता। यहोवा कभी थकता नहीं, उसको कभी विश्राम की आवश्यकता नहीं होती। यहोवा ने ही सभी दूरदराज के स्थान धरती पर बनाये। यहोवा सदा जीवित है। यहोवा शक्तिहीनों को शक्तिशाली बनने में सहायता देता है। वह ऐसे उन लोगों को जिनके पास शक्ति नहीं है, प्रेरित करता है कि वह शक्तिशाली बने। युवक थकते हैं और उन्हें विश्राम की जरुरत पड़ जाती है। यहाँ तक कि किशोर भी ठोकर खाते हैं और गिरते हैं। किन्तु वे लोग जो यहोवा के भरोसे हैं फिर से शक्तिशाली बन जाते हैं। जैसे किसी गरुड़ के फिर से पंख उग आते हैं। ये लोग बिना विश्राम चाहे निरंतर दौड़ते रहते हैं। ये लोग बिना थके चलते रहते हैं।”

विश्वास के साथ परमेश्वर के पास आना

इब्रानियों 11 को अक्सर "विश्वास का दालान" कहा जाता है। यह अध्याय पुराने नियम के उन स्त्री-पुरुषों की एक झलक दिखाता है जिन्होंने परमेश्वर पर भरोसा किया, तब भी जब वे समझ नहीं पा रहे थे कि वह क्या कर रहा है। हाबिल, नूह, अब्राहम, मूसा, इन सभी ने परमेश्वर की बात को सच माना। और इसी महान अध्याय के बीच में लेखक रुककर हमें बताता है कि विश्वास इतना ज़रूरी क्यों है: इसके बिना हम परमेश्वर को खुश नहीं कर सकते।

यह सुनने में कठिन लग सकता है, लेकिन असल में यह बात बड़ी राहत देने वाली है। परमेश्वर हमसे यह नहीं माँग रहा कि हम परफेक्ट हों, या हमारे पास सारे जवाब हों, या हम कभी संघर्ष न करें। वह बस इतना चाहता है कि हम उस पर भरोसा करें। विश्वास ही परमेश्वर के साथ हमारे पूरे रिश्ते की नींव है।

यह आयत हमें दो बातें बताती है जिन पर हमें यकीन करना है। पहली, कि परमेश्वर है। सिर्फ यह नहीं कि शायद वह है, बल्कि यह कि वह सच में है, वह असली है, और वह हमारी ज़िंदगी पर ध्यान दे रहा है। दूसरी, कि वह उन्हें इनाम देता है जो उसे ढूँढते हैं। यह बात बहुत अहम है। परमेश्वर दूर या ठंडा नहीं है। वह एक ऐसा परमेश्वर है जो उन लोगों का जवाब देता है जो उसके पास आते हैं। वह आपकी प्रार्थनाएँ देखता है, आपकी तलाश देखता है, और वह वादा करता है कि उसे ढूँढना कभी बेकार नहीं जाता।

ज़रा सोचिए कि परमेश्वर के "पास आने" का क्या मतलब है। यह एक निजी और जानबूझकर उठाया गया कदम है। परमेश्वर की नज़दीकी अपने आप नहीं मिलती, आपको खुद चुनकर उसके पास आना होता है, प्रार्थना के ज़रिए, उसके वचन को पढ़ने के ज़रिए, आराधना के ज़रिए। और जब आप आते हैं, तो विश्वास ही आपको वहाँ तक ले जाता है। आप यह मानकर आते हैं कि वह है और वह परवाह करता है।

आज, चाहे आप जहाँ भी हों, एक पल रुकिए और परमेश्वर के पास आइए। अपने संदेह लाइए, अपनी चिंताएँ लाइए, अपने सवाल लाइए। परमेश्वर इन सबका स्वागत करता है। बस विश्वास के साथ आइए, यह मानते हुए कि वह सच में है और वह भला है।

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“
विश्वास का मतलब सबूत न होने पर भी मानना नहीं है, बल्कि परिणाम की परवाह किए बिना आज्ञा मानना है।
— George Mueller

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