रोमियों 5:8
“पर परमेश्वर ने हम पर अपना प्रेम दिखाया। जब कि हम तो पापी ही थे, किन्तु यीशु ने हमारे लिये प्राण त्यागे।”
विश्वास के साथ अंत तक दौड़ना
पौलुस ने ये शब्द तीमुथियुस को अपनी आखिरी चिट्ठी में लिखे थे, जब वो रोम की जेल में बंद था और जानता था कि उसकी मृत्यु करीब है। लेकिन उसके शब्दों में पछतावा नहीं था, बल्कि एक गहरी शांति थी।
पौलुस ने अपनी जिंदगी को तीन सरल तस्वीरों में बयान किया: एक लड़ाई, एक दौड़, और एक अमानत जो उसने संभाल कर रखी। हर एक तस्वीर हमें कुछ जरूरी बात सिखाती है। मसीही जीवन हमेशा आसान नहीं होता, यह एक लड़ाई है। असली संघर्ष हैं, असली प्रलोभन हैं, और विश्वास के असली दुश्मन भी हैं। लेकिन पौलुस इसे "अच्छी" लड़ाई कहता है, क्योंकि यह लड़ने लायक है। दौड़ में सबसे तेज़ होना जरूरी नहीं, बस दौड़ पूरी करनी है। और विश्वास को थामे रखने का मतलब है, हर मौसम में, चाहे वो खुशी का हो या दर्द का, यीशु से जुड़े रहना।
इस आयत की असली ताकत उसके संदर्भ में है। पौलुस किसी आरामदायक कुर्सी पर बैठकर एक लंबी और सुखद जिंदगी को याद नहीं कर रहा था। वो जंजीरों में बंधा था, कुछ दोस्तों ने उसे छोड़ दिया था, और कई दुश्मनों ने उसका विरोध किया था। फिर भी उसके शब्दों में कोई कड़वाहट नहीं थी, सिर्फ भरोसा था। और यह भरोसा उसकी अपनी ताकत से नहीं आया था, बल्कि इस यकीन से आया था कि यीशु हर कदम पर उसके साथ रहा।
शायद अभी आप अपनी दौड़ के बीच में हैं और यह बहुत मुश्किल लग रही है। शायद आप थके हुए हैं, या ठोकर खाई है, या आपको लग रहा है कि आगे बढ़ने की ताकत नहीं बची। पौलुस के ये शब्द आपके लिए हैं। आपको दौड़ परफेक्ट तरीके से पूरी नहीं करनी, बस विश्वास के साथ पूरी करनी है।
आज परमेश्वर से मांगिए कि वो आपको आगे बढ़ते रहने की ताकत दे। उसके अनुग्रह पर टिके रहिए, उसके वचन के करीब रहिए, और भरोसा रखिए कि जिसने आपमें एक अच्छा काम शुरू किया है, वो उसे अंत तक जरूर पूरा करेगा।
मुझे कल की कोई चिंता नहीं, क्योंकि मैंने बीता हुआ कल देखा है और आज से मुझे प्यार है।— William Allen White
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