कुलुस्सियों 3:15-16
“तुम्हारे मन पर मसीह से प्राप्त होने वाली शांति का शासन हो। इसी के लिये तुम्हें उसी एक देह में बुलाया गया है। सदा धन्यवाद करते रहो। अपनी सम्पन्नता के साथ मसीह का संदेश तुम में वास करे। भजनों, स्तुतियों और आत्मा के गीतों को गाते हुए बड़े विवेक के साथ एक दूसरे को शिक्षा और निर्देश देते रहो। परमेश्वर को मन ही मन धन्यवाद देते हुए गाते रहो।”
जब शांति की कमान होती है
हम में से ज़्यादातर लोग चिंता को अपनी ज़िंदगी पर हावी होने देते हैं। डर पहले बोलता है, घबराहट सब कुछ तय करती है। लेकिन पौलुस कुछ ऐसा लिखता है जो इसे पूरी तरह पलट देता है: मसीह की शांति को अपने दिलों में राज करने दो।
यहाँ जो शब्द "राज करने" के लिए इस्तेमाल हुआ है, वह यूनानी भाषा के उस शब्द से आता है जिसका मतलब है एक अंपायर या रेफरी। पुराने ज़माने के खेलों में अंपायर का फ़ैसला आखिरी होता था। उसकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी आगे नहीं बढ़ता था। पौलुस कह रहा है कि तुम्हारे दिल की अदालत में शांति को न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठना चाहिए, न कि चिंता को, न कड़वाहट को, न दुनिया के शोर-शराबे को।
कुलुस्सियों की चिट्ठी एक ऐसी कलीसिया को लिखी गई थी जो झूठी शिक्षाओं और सामाजिक दबावों से कई दिशाओं में खिंच रही थी। पौलुस उन्हें आराम करने का कोई तरीका नहीं बता रहा था, बल्कि वह उन्हें इस पक्की समझ की तरफ बुला रहा था कि मसीह कौन है और उसने पहले से क्या कर दिया है। यह शांति कोई ऐसी चीज़ नहीं जो तुम किसी अच्छे दिन खुद बना लो, यह एक तोहफा है उन लोगों के लिए जो एक देह में, एक प्रभु के अधीन, एक साथ जोड़े गए हैं।
ध्यान दो कि पौलुस शांति से कितनी जल्दी मिलजुल कर रहने की बात पर आ जाता है। "क्योंकि तुम एक देह के अंग होकर इसी के लिए बुलाए गए हो।" मसीह की शांति सिर्फ निजी नहीं है, यह यह भी तय करती है कि हम एक-दूसरे के साथ कैसा बर्ताव करते हैं। यह मन की कड़वाहट को ढीला करती है, प्यार से और ईमानदारी से एक-दूसरे को सुधारने की जगह बनाती है। और यह हमारे मुँह को शिकायतों की जगह गीतों से भर देती है।
"मसीह के वचन को अपने भीतर भरपूर रूप से बसने दो।" कभी-कभी नहीं, जब मन हो तब नहीं, बल्कि भरपूर रूप से। जैसे किसी घर में कोई सच में रहता हो, न कि वह घर जिसमें सारी बत्तियाँ बुझी हों।
आज के लिए एक सीधा सवाल: अभी इस वक्त तुम्हारे दिल में किसकी चलती है? जो भी वहाँ राज कर रहा है, वही तुम्हारी बातों को, तुम्हारे रिश्तों को और तुम्हारी आराधना को आकार देगा।
मसीह से विनती करो कि वह वह जगह ले ले जो उसी की है।
परमेश्वर की शांति तब तक नहीं मिलती जब तक शांति का परमेश्वर नहीं मिलता।— Billy Graham
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